ज़िंदगी का सफर - 💞हमसफ़र के साथ💞 "भाग 5"
किआरा ने सबकी सांवलिया नज़रे अपने ऊपर देखी तो वो एक पल के लिए डर गई थी, लेकिन फिर खुदको शांत कर नजरें नीची किये हुए ही बोली
किआरा :- वो माजी अभी अध्विक भैया ने कहा था की घर में सबसे छोटे उत्कर्ष है तो इस हिसाब से मेरी गोद में बैठने और नेक लेने का हक उनका हुआ, पर आपने कहा की ये मेरे बच्चे है इसलिए नहीं बैठ सकते, पर मैं अपनी तरफ से सिर्फ उत्कर्ष ही नहीं वन्या को भी नेक के रूप में आशीर्बाद देना चाहती हु, क्युकी इन दोनो ने ही तो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी पुरी की है एक माँ ना बन पाने को कमी, लेकिन मैं आज इन दोनो को माँ हु तो एक माँ आपने बच्चों को गिफ्ट देना चाहती है और आप मना नहीं करोगे
सुमित्रा जी ( अपनी नम आँखे पोछते हुए ) :- नही बेटा मैं क्यू मना करूंगी, ये तुम्हारे ही बच्चे है तुम इन्हे तोहफ़े देना चाहती हो तो दे सकती हो कोई भी मना नहीं करेगा
किआरा सुमित्रा जी की बात सुनकर मुस्कुरा देती है फिर इवान की तरफ देखती है जैसे उसकी भी रजामंदी मांग रही हो, इवान अपनी पलके झपकाकर अपनी रजामंदी देता है तो किआरा अपने पर्स में से दो बॉक्स निकालती है और उन्हे खोलती है तो उन बॉक्स में दो सोने की चैन थी जिसमे ओम बना हुआ था, किआरा बारी बारी से उत्कर्ष और वन्या को पहना देती है, ये देखकर सभी औरते हैरान हो जाती है और सुमित्रा जी बोलती है
सुमित्रा जी :- बेटा ये......
सुमित्रा जी आगे कुछ बोलती उससे पहले ही किआरा बोलती है
किआरा :- माजी ये पवित्र लॉकेट है इन्हे मेने पंडित जी से बोलकर पूजा करवाई थी, इन्हे पहनने से उत्कर्ष और वन्या को किसी की नज़र नहीं लगेगी और दोनो हर संकट से दूर भी रहेंगे, ये इनकी रक्षा के लिए है, ओर जो भी बुरी बला होगी वो टल जाएगी
सुमित्रा जी पायल जी, दादी ओर बाकी सभी किआरा की बात सुनकर खुश हो गये ओर मन ही मन सोचने लगे की आज के कलयुग मे भी सचमे ऐसी औरते होती है जो दुसरो के बच्चों की परवाह बिल्कुल अपने बच्चे की तरह करती हो
इवान किआरा की तरफ देखकर सोचने लगा की उसका किआरा से शादी करने का डिसीजन बिल्कुल सही था, अगर किआरा की जगह कोई ओर होती तो शायद ही एसा कुछ करती ।
कुछ देर बाद सारी औरते खाना खाकर चली गई तो आध्या और आन्या ने किआरा को इवान के रूम मे लाई
इवान के रूम की डेकोरेशन की हुई थी पर फिर किआरा ने उन सब पर बिना ध्यान दिये बोली
किआरा :- आध्या दी आन्या दी वो.........
किआरा आगे कुछ बोलती उससे पहले ही आध्या किआरा को रोकते हुए बोली
आध्या :- भाभी हम दोनो भाई और आपसे छोटे है तो आप हमे दी मत बोला कीजिये ना प्लीज, आप हमे हमारे नाम से ही बुलाया कीजिगे ना प्लीज😰
आन्या :- यस भाभी प्लीज आप हमे हमारे नाम से ही बुलाया कीजिये
किआरा :- ओके ठीक है मैं अब आपको आपके नाम से बुलाऊंगी ठीक है आध्या, आन्या 😊
आन्या और आध्या दोनो एक साथ :- बिल्कुल ठीक भाभी, अब आप बताइये आप क्या बोल रही थी
किआरा :- वो मैं आपसे पूछना चाह रही थी की वन्या और उत्कर्ष कहा है, क्या आप उन दोनो को मेरे पास छोड़ सकती हो
आध्या :- पर भाभी आज तो आपकी............
किआरा ( आध्या को बीच मे रोकते हुए ) :- प्लीज आध्या आन्या
आन्या :- लेकिन भाभी.....
आन्या आगे कुछ बोलती उससे पहले ही उन तीनो को बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी, उन तीनो ने दरवाजे की तरफ देखा तो सुमित्रा जी और पायल जी उत्कर्ष और वन्या को अपनी गोद मे लिए हुए दरवाजे पर खड़ी थी, वो दोनो अंदर आई तो किआरा ने उनकी गोद से वन्या और उत्कर्ष को ले लिया तो पायल जी बोली
पायल जी :- दीदी आपने सही कहा था, किआरा बच्चों के लिए जरूर कहेगी और यहां आकर देखा तो सच मे वही हुआ जो आपने कहा था😊
सुमित्रा जी :- हा पायल इतने समय मे मैं अपनी बहु को इतना तो जान गई हु की वो कैसी है, उसके इन्ही गुणों की बजह से ही तो मैने उसे अपने इवान के लिए पसंद किया था, मुझे पता था बेटा की तुम वन्या और उत्कर्ष के लिए जरूर पूछोगे इसलिए ले आई मैं इन्हे यहां, सम्भालो तुम अब अपने बच्चों को मुझे तो रो रोकर परेशान करदिया है, चलो बेटा बाते बहुत हुई सो जाओ अब बहुत लेट हो गया है ( आध्या और आन्या की तरफ देखकर ) तुम दोनो भी चलो
सुमित्रा जी और पायल जी, आन्या और आध्या को लेकर चली गई तो किआरा बच्चों को बेड पर अच्छे से सुलाकर दोनो को लोरी गाकर सुलाने लगी
आ चल के तुझे,
मैं ले के चलूँ
इक ऐसे गगन के ग़म
ग़म भी न हो,
आँसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
सूरज की पहली किरण से
आशा का सवेरा जागे
चंदा की किरण से धुल कर
घनघोर अंधेरा भागे
कभी धूप खिले,
कभी छाँव मिले
लम्बी सी डगर न खले
जहाँ ग़म भी नो हो..
जहाँ दूर नज़र दौड़ाएँ
आज़ाद गगन लहराए
जहाँ रंग-बिरंगे पंछी
आशा का संदेसा लाएँ
सपनों में पली
हँसती हो कली
जहाँ शाम सुहानी ढले
जहाँ ग़म भी न हो..
सपनों के ऐसे जहां में
जहाँ प्यार ही प्यार खिला हो
हम जा के वहाँ खो जाएँ
शिकवा न कोई गिला हो
कहीं बैर न हो,
कोई गैर न हो
सब मिलके यूँ चलते चलें
जहाँ गम भी न हो..
किआरा, उत्कर्ष और वन्या को सुलाने लगी, तभी इवान आया और किआरा को बच्चों को सुलाते देखने लगा, फिर दरबाजा बंद करके अंदर आया तो किआरा दरवाज़ा बंद होने की आवाज सुनी तो लोरी गाना बंद कर पलट कर देखा तो इवान को देख वो थोड़ा असहज हो गई लेकिन फिर जल्दी ही नॉर्मल होकर फिरसे बच्चों को सुलाने लगी ।
इवान ने जाकर अलमारी से कपड़े निकाले और फ्रेश होने चला गया तो किआरा ने एक लम्बी सास ली और वही बेड के एक साइड बैठ गई और वन्या और उत्कर्ष को थपथपाने लगी, लेकिन धीरे धीरे दिनभर की थकान के कारण उसे नींद आ गई और वो वही बैठे बैठे सो गई
इवान वाशरूम से बाहर आया तो किआरा को ऐसे बैठे बैठे, हैवी जवैलरी और इतनी भारी साड़ी मे सोते देखा तो उसके पास जाकर उसे आवाज देने लगा लेकिन किआरा नहीं जागी तो उसने हिम्मत कर अपने हाथ को उठाया किआरा को जगाने के लिए लेकिन तभी वन्या रोने लगी तो उसने अपना हाथ खींच लिया और वन्या को उठा कर सुलाने लगा लेकिन तभी किआरा की नींद खुल गई तो इवान बोला
इवान :- आप जाकर चेंज कर आइये, इतनी हैवी ज्वेलरी और साड़ी मे आपको नींद नहीं आएगी
किआरा ने हा मे सिर हिलाया और वही पास मे रखे बेग से कपड़े निकाल कर चेंज करने वाशरूम मे चली गई, जब बाहर आई तो देखा इवान ने वन्या को सुला दिया था और खुद भी वही उनके साइड मे लेटकर दोनो को थपथापकर सुला रहा था, किआरा भी जाकर खामोशी से दूसरी साइड लेट गई, थोड़ी देर बाद दोनो को ही नींद आ गई और दोनो ही सो गये
To be continued...................
Prashant Chouhan
11-Nov-2022 06:11 PM
Nice chapter 😍
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Miss Chouhan
11-Nov-2022 11:15 AM
Nice story😊😊😊
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Seema Priyadarshini sahay
10-Oct-2022 06:20 PM
बेहतरीन
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